जेलों की तस्वीर: अपराध का आईना या न्याय का छलावा?

जेल की ऊँची दीवारों के भीतर बंद कैदियों की भीड़, असल में भारत के समाज और न्याय व्यवस्था की असमानताओं का आईना है। अपराधी वही नहीं है जो जेल में है, बल्कि वह भी है जो सत्ता, पैसे और जातीय विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके अपराध कर भी बच निकलता है।

आरक्षण का असली दर्द: कुर्सी पर बैठा “नीचे का आदमी”

आरक्षण बुरा नहीं था। बुरा यह था कि उसने “नीचे वालों” को कुर्सी पर बैठा दिया और यही भारत के सामाजिक संघर्ष का सबसे बड़ा सत्य है।

बौद्ध धम्म का पतन और भारतीय लोकतंत्र का संकट: एक तुलनात्मक अध्ययन

बौद्ध धम्म का पतन और भारतीय लोकतंत्र का संकट: एक तुलनात्मक अध्ययन

जैसे ब्राह्मणवादी शक्तियों ने एक हज़ार साल पहले बौद्ध धम्म को कमजोर किया, वैसे ही आज RSS और हिंदुत्व राजनीति लोकतंत्र को चुनौती दे रही है। पढ़ें पूरा विश्लेषण।

लोकतंत्र बनाम सत्ता: बदलते सितारे और जागता भारत

नरेंद्र मोदी सरकार, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राहुल गांधी की नई छवि, एजेंसियों के दुरुपयोग, विदेश नीति की चुनौतियाँ और भ्रष्टाचार के आरोप—लोकतंत्र बनाम सत्ता की गहराई से पड़ताल।