भ्रष्टाचार: जब बीमारी नहीं, व्यवस्था ही बन जाए

भ्रष्टाचार: जब बीमारी नहीं, व्यवस्था ही बन जाए

भारत में भ्रष्टाचार अब अपराध नहीं माना जाता। भ्रष्टाचार अब एक कौशल मान लिया गया है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लाया गयी भाजपा सरकार ने आप इसे संस्थागत मान्यता प्रदान कर दी है।

वोटर सूची में अनियमितताएँ और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल

वोटर लिस्ट से पात्र लोगों के नाम हटाना और उसमें फर्जी काल्पनिक लोगों के नाम जोड़ना, अस्तित्व विहीन घरों में हजारों फर्जी वोटरों को पैदा करना, एक ही नाम को कई प्रदेशों की वोटर लिस्ट में पाये जाने के काम में चुनाव आयोग ने विशेषज्ञता हासिल की है।

लॉबिंग पर अरबों खर्च, नागरिकों पर बोझ: भारत सरकार के व्यय का सवाल

लॉबिंग पर अरबों खर्च, नागरिकों पर बोझ: भारत सरकार के व्यय का सवाल

लोकतांत्रिक शासन की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों के अधिकारों और ज़रूरतों की रक्षा करना है। यदि भारत सरकार विदेशी लॉबिंग पर करोड़ों रुपये मासिक खर्च करती है, जबकि देश के भीतर करदाताओं की मूलभूत आवश्यकताएँ अधूरी हैं, तो यह न केवल आर्थिक दृष्टि से अनुचित है बल्कि नैतिक रूप से भी सवालों के घेरे में आता है।

मोदी राज में “मानवाधिकार” शब्द का ग़ायब होना

पुलिस अत्याचार की बात हो, कस्टोडियल डेथ हो, दलित उत्पीड़न हो या स्त्रियों पर हिंसा—हर जगह मानवाधिकार की बहस होती थी। विश्वविद्यालयों से लेकर स्वयंसेवी संगठनों तक, अदालतों से लेकर मीडिया तक, यह शब्द लोकतंत्र की आत्मा की तरह गूंजता था। मोदी सत्ता में क्यों गायब है?

पुलिस भर्ती में मनोवैज्ञानिक जाँच क्यों अनिवार्य होनी चाहिए

पुलिस का लक्ष्य सिर्फ़ अपराधी पकड़ना नहीं, बल्कि न्याय स्थापित करना है। मनोरोगी प्रवृत्ति के लोग उसे हिंसा और भय का साधन बना देते हैं। गहन मनोवैज्ञानिक जाँच अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है।

जब शिक्षा इंसानियत भूल जाए: हिटलर से आज का सबक

क्या हम भी हिटलर जैसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं? अगर शिक्षा केवल प्रतिस्पर्धा, लालच और सत्ता का साधन बनकर रह जाएगी तो भविष्य का भारत संवेदनशील नागरिकों का नहीं, बल्कि “डिग्रीधारी मनोरोगियों” का समाज बन जाएगा।

💳 क्रेडिट कार्ड का मनोविज्ञान: विशेषाधिकार या कर्ज़ का जाल?

क्रेडिट कार्ड के छोटे-मोटे लाभ आपको कर्ज़ के साथ सहज बनाने के लिए बनाए गए हैं। पैसा आपको शांति देने के लिए होता है, और क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग उस शांति का सबसे बड़ा दुश्मन है। मज़बूत डेबिट कार्ड और बचत खाता ही असली ताक़त है। असली वित्तीय शांति अपनी आय के भीतर जीने और कर्ज़ के जाल से बचने में है।

हीनयान बनाम महायान: अपमानजनक नामकरण का इतिहास

हीनयान शब्द बौद्ध धम्म की पुरानी परम्पराओं के लिए प्रयुक्त हुआ, जिसका शाब्दिक अर्थ “तुच्छ मार्ग” है और यह महायानियों द्वारा अपमानजनक रूप में गढ़ा गया। महायान ने स्वयं को “महान मार्ग” कहकर श्रेष्ठ ठहराया और पुराने थेरवाद/स्थविरवाद को हीन दिखाया।
ये दिखाता है कि धार्मिक प्रतिस्पर्धा में भाषा सत्ता और प्रतिष्ठा की राजनीति का उपकरण बन जाती है।

राष्ट्रवाद के नाम पर लूट: जब विदेश नीति कॉर्पोरेट लाभ का मोहरा बन जाए

क्या भारत की विदेश नीति अब जनहित नहीं, बल्कि अरबपति हितों की सेवा में बदल चुकी है? इस लेख में हम उस भ्रमजाल को खंगालते हैं जिसमें राष्ट्र को एक व्यक्ति में समेटकर, जनता को हाशिए पर धकेल दिया गया है।

संसद में पेश 130 संविधान संशोधन बिल: लोकतंत्र की हत्या कानून से वैधता

यह 130वां संविधान संशोधन विधेयक सत्ता की नैतिकता नहीं, बल्कि विपक्ष को समाप्त करने का औज़ार है। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि से ऊपर रखकर यह लोकतंत्र की जड़ें खोदता है और संघीय ढाँचे को खोखला करता है। भारत बहुदलीय लोकतंत्र से एकदलीय शासन की ओर।