जन्म और मृत्यु के बीच का अन्तराल ‘जीवन’ है। इसमें खुश रहें और दूसरों को खुश रखें।
जीवन: जन्म और मृत्यु के बीच का अंतराल

जन्म और मृत्यु के बीच का अन्तराल ‘जीवन’ है। इसमें खुश रहें और दूसरों को खुश रखें।
लोकतंत्र कभी अचानक ढहता नहीं, वह धीरे-धीरे भीतर से खोखला किया जाता है। मोदी सरकार और RSS ने इसे “सलामी स्लाइसिंग” की कला बना दिया है—छोटे-छोटे बदलाव, जो मामूली लगते हैं, लेकिन मिलकर संविधान, संस्थाएँ और नागरिक अधिकारों की नींव हिला देते हैं। असली खतरा यही है कि जब जनता को पूरा सच समझ आएगा, तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होगा।
ललई सिंह यादव (1911–1993), उत्तर भारत के पेरियार, ने “सच्ची रामायण” के प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक ऐतिहासिक लड़ाई जीती। बौद्ध धर्म अपनाकर जातिसूचक पहचान छोड़ी और जीवनभर ब्राह्मणवाद के खिलाफ बहुजन मुक्ति आंदोलन चलाया। उनके नाटक, पुस्तकें और प्रकाशन ने सामाजिक न्याय और वैचारिक स्वतंत्रता की नई चेतना जगाई।
आधुनिक विचारक व वैज्ञानिक बुद्ध के बारे में क्या विचार रखते है, विस्तार से बताया गया है।
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