भारत की न्यायपालिका पर निष्पक्षता खोने का आरोप गहराता जा रहा है। भाजपा शासनकाल में कई जजों की नियुक्ति और विवादित फैसलों ने इस आशंका को मजबूत किया है कि अदालतें संवैधानिक संरक्षक के बजाय राजनीतिक हितों का औज़ार बनती जा रही हैं।
न्यायपालिका में वैचारिक झुकाव: भाजपा शासनकाल और न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्न
