स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद: निजता पर नया खतरा

निजता

भारत की आज़ादी को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन मौजूदा हालात में स्वतंत्रता पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। निजता, अभिव्यक्ति और नागरिक अधिकारों पर बढ़ते नियंत्रण ने यह आशंका पैदा कर दी है कि कहीं हमारी लोकतांत्रिक आज़ादी धीरे-धीरे खोखली न हो रही हो। सत्ता और व्यवस्था के दबाव में जनता फिर से एक नए तरह की परतंत्रता की ओर धकेली जा रही है।

उत्तर भारत के पेरियार: ललई सिंह यादव – सामाजिक क्रांति के अथक योद्धा

ललई सिंह यादव (1911–1993), उत्तर भारत के पेरियार, ने “सच्ची रामायण” के प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक ऐतिहासिक लड़ाई जीती। बौद्ध धर्म अपनाकर जातिसूचक पहचान छोड़ी और जीवनभर ब्राह्मणवाद के खिलाफ बहुजन मुक्ति आंदोलन चलाया। उनके नाटक, पुस्तकें और प्रकाशन ने सामाजिक न्याय और वैचारिक स्वतंत्रता की नई चेतना जगाई।