भारत की आज़ादी को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन मौजूदा हालात में स्वतंत्रता पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। निजता, अभिव्यक्ति और नागरिक अधिकारों पर बढ़ते नियंत्रण ने यह आशंका पैदा कर दी है कि कहीं हमारी लोकतांत्रिक आज़ादी धीरे-धीरे खोखली न हो रही हो। सत्ता और व्यवस्था के दबाव में जनता फिर से एक नए तरह की परतंत्रता की ओर धकेली जा रही है।
स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद: निजता पर नया खतरा
