डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-3 “सिख या मुसलमान वह शक्ति कहां से ग्रहण करता है, जो उसे …
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-3

डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-3 “सिख या मुसलमान वह शक्ति कहां से ग्रहण करता है, जो उसे …
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-2 “लोकतंत्र की मेरी परिभाषा है – शासन का एक ऐसा रूप और …
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-1 “मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन महिलाओं की प्रगति के स्तर …
नरेंद्र मोदी सरकार, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राहुल गांधी की नई छवि, एजेंसियों के दुरुपयोग, विदेश नीति की चुनौतियाँ और भ्रष्टाचार के आरोप—लोकतंत्र बनाम सत्ता की गहराई से पड़ताल।
लोकतांत्रिक शासन की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों के अधिकारों और ज़रूरतों की रक्षा करना है। यदि भारत सरकार विदेशी लॉबिंग पर करोड़ों रुपये मासिक खर्च करती है, जबकि देश के भीतर करदाताओं की मूलभूत आवश्यकताएँ अधूरी हैं, तो यह न केवल आर्थिक दृष्टि से अनुचित है बल्कि नैतिक रूप से भी सवालों के घेरे में आता है।
यह 130वां संविधान संशोधन विधेयक सत्ता की नैतिकता नहीं, बल्कि विपक्ष को समाप्त करने का औज़ार है। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि से ऊपर रखकर यह लोकतंत्र की जड़ें खोदता है और संघीय ढाँचे को खोखला करता है। भारत बहुदलीय लोकतंत्र से एकदलीय शासन की ओर।
(Crisis of public institutions in India and its solutions) जब हम न्याय मांगते हैं, जब हम सच्चाई खोजते हैं, जब …