(A Memoir: COVID-Time and The Treasure of the Stock Market)

कोविड-19 महामारी ने भले ही दुनिया भर के करोड़ों लोगों के जीवन को अव्यवस्था और दुख दिया हो, लेकिन मेरे लिए इसने एक अनोखी राह खोली। इस महामारी ने मुझे एक ऐसी विधा से परिचित कराया, जिसे मैं आज तक किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं मानता — वह खजाना है: स्टॉक मार्केट (शेयर बाज़ार)

कोविड महामारी के करीब डेढ़ वर्षों के दौरान न केवल हमारे देश में, बल्कि पूरी दुनिया में लोगों का आपसी मेल-जोल, मुलाकातें, बैठकों का सिलसिला पूरी तरह ठप हो गया था। भारत सरकार ने तो लॉकडाउन जैसी सख्त व्यवस्थाएँ भी लागू कीं, जिसमें घर से बाहर निकलना लगभग कानूनन प्रतिबंधित था। ऐसे में, इस खाली समय में जब बोरियत हावी होने लगी, मैंने इंटरनेट का सहारा लेकर स्टॉक मार्केट की बुनियादी जानकारी लेना शुरू किया।

इसके बाद मैंने ज़ेरोधा (Zerodha) में एक डिमैट अकाउंट खुलवाया और शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग की शुरुआत की। मेरे व्यक्तित्व की एक खासियत यह है कि मुझमें आर्थिक जोखिम उठाने की क्षमता सामान्य से कहीं अधिक है। मैंने बिना किसी फॉर्मल शिक्षा या गुरु के मार्गदर्शन के ही स्टॉक मार्केट, विशेष रूप से ऑप्शन सेलिंग, सीख ली।

ऑप्शन सेलिंग को शेयर बाज़ार का सबसे जोखिमपूर्ण घटक माना जाता है, क्योंकि इसमें नुकसान की सीमा असीमित हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि आप 1-1 लाख रुपये के 10 शेयर खरीदते हैं, तो अधिकतम ₹10 लाख का नुकसान ही आपको संभव है; लेकिन ऑप्शन सेलिंग में आपकी पूरी पूंजी समाप्त हो सकती है। शायद आप ऑप्शन सेलिंग के इस जोखिम को महसूस कर पा रहे होंगे।

लेकिन मेरे अध्ययन और अनुभव ने बताया कि यह जोखिम केवल सैद्धांतिक तौर पर ही इतना बड़ा है, व्यवहार में यह नियंत्रित और समझदारी से किया जाए तो लाभकारी होता है। मेरी पिछले चार साल की स्टॉक मार्केट यात्रा का निष्कर्ष साफ है — ऑप्शन बाइंग अधिकतर नुकसान करवाती है, जबकि ऑप्शन सेलिंग सही रणनीति से की जाए तो स्थायी आय का साधन बन सकती है।

ऑप्शन सेलिंग ने मुझे सिर्फ आर्थिक आत्मनिर्भरता ही नहीं दी, बल्कि उस स्तर तक पहुंचाया कि जितनी रिटायर्ड लोगों की साल भर की पेंशन भी नहीं होती, उतना मैं सालाना आयकर देता हूँ।

मैंने देखा है कि लोग जीवनभर आर्थिक संकट से जूझते रहते हैं। यदि उन्हें कहो कि मैं तुम्हें ऑप्शन सेलिंग सिखा देता हूँ, तब भी वे शेयर बाज़ार में कदम रखने से डरते हैं। जबकि सच यह है कि शेयर बाज़ार एक सागर है — आप जितना चाहें उससे निकाल लें, सागर का जल कम नहीं होता।

जीवन के कुछ रोचक अनुभव

ये अनुभव एक ऐसी बात से आपका परिचय करायेंगे कि लोग भले आर्थिक संकट में जीवन काटते रहें पर वे कमाने के लिए कुछ नया नहीं करना चाहते। 

एक बार मैंने अपने एक मित्र से कहा, “चलो बैंकाक और सिंगापुर घूमकर आते हैं।” उन्होंने तुरंत पैसे की कमी का रोना शुरू कर दिया।

एक दिन मैं एक अन्य मित्र के साथ चश्मे की दुकान पर गया। दुकानदार ने मित्र के चश्मे के लिए ₹500 का एक फ्रेम दिखाया, जिस पर मेरे मित्र बोले, “और सस्ता दिखाइए।” मैं मन ही मन हतप्रभ था। सोच रहा था कि मेरे चश्मे की कीमत ₹44,000 है, तो महँगा ₹500 का फ्रेम है या मेरा ₹44,000 वाला?

इसी तरह एक और मित्र हैं, जिन्हें पता चला कि मैं दुबई से घूमकर लौटा हूँ। उन्होंने फोन पर ही पूछ लिया, “दुबई से मेरे लिए क्या गिफ्ट लाए हो?” मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “रविवार को मिलते हैं, तब दूंगा।” मैं फीनिक्स मॉल गया और उनके लिए एक बढ़िया पावर बैंक खरीदी और रविवार को उन्हें गिफ्ट दे दी। यह वही मित्र हैं जिन्होंने जीवन में कभी मेरी लीगल तरीके से पैसे कमाने की बातों पर अमल नहीं किया, लेकिन मुझसे गिफ्ट लेने का कोई मौका भी नहीं छोड़ा।

निष्कर्ष

कोविड के उस कठिन दौर ने मुझे वह दृष्टि दी कि आर्थिक स्वतंत्रता केवल आय के साधनों को समझने और उन्हें सही तरीके से उपयोग करने से आती है, न कि केवल किस्मत के भरोसे बैठे रहने से। शेयर मार्केट ने मेरी सोच, मेरी ज़िन्दगी और मेरे आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

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