17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के पीछे की सच्चाई, इसकी औपनिवेशिक जड़ें और बहुजन सशक्तिकरण के लिए पेरियार की तर्कवादी विरासत क्यों महत्वपूर्ण है, इसकी खोज करें।
पेरियार बनाम विश्वकर्मा पूजा

17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के पीछे की सच्चाई, इसकी औपनिवेशिक जड़ें और बहुजन सशक्तिकरण के लिए पेरियार की तर्कवादी विरासत क्यों महत्वपूर्ण है, इसकी खोज करें।
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर एक युगपुरुष थे। वे न केवल भारत के संविधान निर्माता थे, बल्कि एक प्रखर चिंतक, समाज सुधारक, विधिवेत्ता, और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्षरत योद्धा थे। उनका जीवन एक प्रेरणा है—संघर्ष से सफलता तक की यात्रा, जिसमें उन्होंने सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई और समता, न्याय तथा बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित किया।
प्रेम का मात्र विचार ही मन को प्रसन्न कर सकता है, प्रेम बादलों से भरे दिन में अचानक उगता सूरज है। प्रेम जैविक है, साझा क्षणों की मिट्टी से उगता है और अंतरंगता द्वारा पोषित होता है। प्यार पत्थर की तरह यूँ ही नहीं पड़ा रहता; इसे रोटी की तरह बनाना पड़ता है; हर समय नया बनाना पड़ता है, नया बनाना पड़ता है।
भारतीय, ग्रीक और आधुनिक दर्शन में प्रेम का गहन विश्लेषण। प्लेटो, सूफी संतों और एरिक फ़्रॉम के विचारों के माध्यम से प्रेम का आयाम।
प्रेम क्या है? क्या यह आकर्षण और वासना से अलग है? इस लेख में प्रेम की परिभाषा, अनुभव और साहित्यिक-सांस्कृतिक दृष्टि से विश्लेषण।
भारत की विदेश नीति का विश्लेषण, पिछले एक दशक का परिदृश्य, चुनौतियाँ और रोडमैप: भारत की विदेश नीति दोराहे पर खड़ी है: मजबूत जीडीपी वृद्धि और रक्षा व्यय के विपरीत अनसुलझे सीमा विवाद, अमेरिकी व्यापार तनाव और एक दशक से मिश्रित कूटनीतिक परिणाम सामने आ रहे हैं।
भारत का आर्थिक विरोधाभास: बड़ा सकल घरेलू उत्पाद, जीवन की निम्न गुणवत्ता, 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था का एक संक्षिप्त विवरण – पाँचवीं सबसे बड़ी जीडीपी, लेकिन कम प्रति व्यक्ति आय, गहरी असमानता और कमज़ोर मानव विकास संकेतक।
जब सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग में टकराव गहराता है, तो लोकतंत्र की नींव हिलती है। बिहार का मतदाता सूची विवाद इसी संकट का प्रतीक है।
साहित्य मानव जीवन का दर्पण है, जो समाज, संवेदनाओं और आत्मचिंतन को जोड़ता है। पढ़िए साहित्य और मनुष्यता के गहरे रिश्ते पर यह लेख।
जेल की ऊँची दीवारों के भीतर बंद कैदियों की भीड़, असल में भारत के समाज और न्याय व्यवस्था की असमानताओं का आईना है। अपराधी वही नहीं है जो जेल में है, बल्कि वह भी है जो सत्ता, पैसे और जातीय विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके अपराध कर भी बच निकलता है।