मौर्यकाल के बाद भारत में बौद्ध धम्म की स्थिति

बुद्ध के जीवन काल में बौद्ध धम्म जीवन की एक महत्वपूर्ण जीवनशैली बन चुका था। उनके बाद अशोक ने धम्म को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। मौर्य काल (वृहद्रथ की हत्या के) बाद कहा जाता है कि बौद्ध धम्म समाप्त हो गया था, परन्तु ये कथन ग़लत है। मौर्य काल के बाद भी कई शताब्दियों तक भारत में बौद्ध धम्म अपने चर्मोत्कर्ष पर था, खूब फला-फूला और फैला।

भारत का लोकतंत्र संकट में

Four Crises of Indian Democracy

भारत की चुनावी प्रक्रिया, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और नागरिक स्वतंत्रता पर गहरे सवाल। जानिए कैसे लोकतंत्र खतरे में है और नागरिक समाज इसकी रक्षा के लिए क्या कर रहा है।

समानता की परछाइयाँ भाग-3

समानता की परछाइयाँ भाग-3

क्या नेतृत्व का असली अर्थ सबको खुश करना है, या सच कहने की हिम्मत रखना—even अगर वह सबको असुविधा में डाल दे? क्या रिश्तों में सच्चाई और बराबरी का मतलब सिर्फ़ बड़े फैसलों में है, या रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में भी इसकी परख होती है? क्या समाज का आईना हमें सही दिखाता है, या हमें ही अपनी परछाई उसमें गढ़नी पड़ती है? क्या समाज का आईना हमें सही दिखाता है, या हमें ही अपनी परछाई उसमें गढ़नी पड़ती है?

समानता की परछाइयाँ भाग-2

समानता की परछाइयाँ, भाग-2

परंपरा बनाम परिवर्तन, नेतृत्व की अग्निपरीक्षा या समानता की परछाइयाँ, किसकी विजय होगी? परिवार का हस्तक्षेप, पिता का पारंपरिक दृष्टिकोण, माँ का भावनात्मक सहारा, नंदिता के लिए क्या अहम् होगा?

समानता की परछाइयाँ भाग-1

समानता की परछाइयाँ

नेतृत्व का अर्थ आदेश देना या सिर्फ़ प्रेरित करना नहीं है। नेतृत्व का असली मतलब है सहयात्रा। पक्षी तभी उड़ सकता है जब उसके दोनों पंख बराबर हों। एक पंख से उड़ान अधूरी है। समाज भी ऐसा ही है। अगर पुरुष और स्त्री, दोनों बराबरी से निर्णय नहीं लेंगे, तो नेतृत्व अधूरा रहेगा।