औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित है” — यह एक मिथक है, एक झूठ, जिसे पितृसत्ता और बाजार ने मिलकर रचा।
औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित? — मिथक, डेटा और हकीकत

औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित है” — यह एक मिथक है, एक झूठ, जिसे पितृसत्ता और बाजार ने मिलकर रचा।
बुद्ध के जीवन काल में बौद्ध धम्म जीवन की एक महत्वपूर्ण जीवनशैली बन चुका था। उनके बाद अशोक ने धम्म को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। मौर्य काल (वृहद्रथ की हत्या के) बाद कहा जाता है कि बौद्ध धम्म समाप्त हो गया था, परन्तु ये कथन ग़लत है। मौर्य काल के बाद भी कई शताब्दियों तक भारत में बौद्ध धम्म अपने चर्मोत्कर्ष पर था, खूब फला-फूला और फैला।
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-4 “हज्जाज को भेजे गए अपने एक संदेश में, मोहम्मद बिन कासिम ने कहा …
भारत की चुनावी प्रक्रिया, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और नागरिक स्वतंत्रता पर गहरे सवाल। जानिए कैसे लोकतंत्र खतरे में है और नागरिक समाज इसकी रक्षा के लिए क्या कर रहा है।
क्या नेतृत्व का असली अर्थ सबको खुश करना है, या सच कहने की हिम्मत रखना—even अगर वह सबको असुविधा में डाल दे? क्या रिश्तों में सच्चाई और बराबरी का मतलब सिर्फ़ बड़े फैसलों में है, या रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में भी इसकी परख होती है? क्या समाज का आईना हमें सही दिखाता है, या हमें ही अपनी परछाई उसमें गढ़नी पड़ती है? क्या समाज का आईना हमें सही दिखाता है, या हमें ही अपनी परछाई उसमें गढ़नी पड़ती है?
परंपरा बनाम परिवर्तन, नेतृत्व की अग्निपरीक्षा या समानता की परछाइयाँ, किसकी विजय होगी? परिवार का हस्तक्षेप, पिता का पारंपरिक दृष्टिकोण, माँ का भावनात्मक सहारा, नंदिता के लिए क्या अहम् होगा?
नेतृत्व का अर्थ आदेश देना या सिर्फ़ प्रेरित करना नहीं है। नेतृत्व का असली मतलब है सहयात्रा। पक्षी तभी उड़ सकता है जब उसके दोनों पंख बराबर हों। एक पंख से उड़ान अधूरी है। समाज भी ऐसा ही है। अगर पुरुष और स्त्री, दोनों बराबरी से निर्णय नहीं लेंगे, तो नेतृत्व अधूरा रहेगा।
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-3 “सिख या मुसलमान वह शक्ति कहां से ग्रहण करता है, जो उसे …
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-2 “लोकतंत्र की मेरी परिभाषा है – शासन का एक ऐसा रूप और …
डॉ. बी.आर. आंबेडकर के महत्वपूर्ण कथन, भाग-1 “मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन महिलाओं की प्रगति के स्तर …