संस्मरण केवल स्मृति नहीं होते, वे समय के गलियारों से निकलती वो आवाजें हैं जो दिल को छू जाती हैं। एक व्यक्ति के अनुभव में कभी-कभी पूरा युग छिपा होता है।
आज का यह संस्मरण मेरी दादी से जुड़ा है – एक ऐसी महिला जो कभी रेडियो पर भजन सुनती थीं और अंत में स्मार्टफोन पर व्हाट्सऐप पर शुभ प्रभात भेजना सीख गई थीं।
यह उनके साथ बिताए उन दिनों की कहानी है, जो सादगी में लिपटे हुए, गहरे अर्थ छोड़ गए।

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