औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित है” — यह एक मिथक है, एक झूठ, जिसे पितृसत्ता और बाजार ने मिलकर रचा।
औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित? — मिथक, डेटा और हकीकत

औरत का काम केवल बिस्तर तक सीमित है” — यह एक मिथक है, एक झूठ, जिसे पितृसत्ता और बाजार ने मिलकर रचा।
बुद्ध के जीवन काल में बौद्ध धम्म जीवन की एक महत्वपूर्ण जीवनशैली बन चुका था। उनके बाद अशोक ने धम्म को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। मौर्य काल (वृहद्रथ की हत्या के) बाद कहा जाता है कि बौद्ध धम्म समाप्त हो गया था, परन्तु ये कथन ग़लत है। मौर्य काल के बाद भी कई शताब्दियों तक भारत में बौद्ध धम्म अपने चर्मोत्कर्ष पर था, खूब फला-फूला और फैला।
भारत की चुनावी प्रक्रिया, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और नागरिक स्वतंत्रता पर गहरे सवाल। जानिए कैसे लोकतंत्र खतरे में है और नागरिक समाज इसकी रक्षा के लिए क्या कर रहा है।
परंपरा बनाम परिवर्तन, नेतृत्व की अग्निपरीक्षा या समानता की परछाइयाँ, किसकी विजय होगी? परिवार का हस्तक्षेप, पिता का पारंपरिक दृष्टिकोण, माँ का भावनात्मक सहारा, नंदिता के लिए क्या अहम् होगा?
डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर एक युगपुरुष थे। वे न केवल भारत के संविधान निर्माता थे, बल्कि एक प्रखर चिंतक, समाज सुधारक, विधिवेत्ता, और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्षरत योद्धा थे। उनका जीवन एक प्रेरणा है—संघर्ष से सफलता तक की यात्रा, जिसमें उन्होंने सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई और समता, न्याय तथा बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित किया।
भारतीय, ग्रीक और आधुनिक दर्शन में प्रेम का गहन विश्लेषण। प्लेटो, सूफी संतों और एरिक फ़्रॉम के विचारों के माध्यम से प्रेम का आयाम।
प्रेम क्या है? क्या यह आकर्षण और वासना से अलग है? इस लेख में प्रेम की परिभाषा, अनुभव और साहित्यिक-सांस्कृतिक दृष्टि से विश्लेषण।
जेल की ऊँची दीवारों के भीतर बंद कैदियों की भीड़, असल में भारत के समाज और न्याय व्यवस्था की असमानताओं का आईना है। अपराधी वही नहीं है जो जेल में है, बल्कि वह भी है जो सत्ता, पैसे और जातीय विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके अपराध कर भी बच निकलता है।
आरक्षण बुरा नहीं था। बुरा यह था कि उसने “नीचे वालों” को कुर्सी पर बैठा दिया और यही भारत के सामाजिक संघर्ष का सबसे बड़ा सत्य है।
सोशल मीडिया: जनमत का आईना या भ्रम का बाज़ार? सोशल मीडिया हमारे समय की सबसे ताक़तवर खोजों में से एक …